ये नहाना समझ से परे है, जिसमें आगे न है पीछे भी न है तो फिर ये दुनिया हा कराने के चक्कर में क्यों पड़ी है
दुनिया में सच्ची इमानदारी तब आएगी जब विध्यार्थी परीक्षा में नक़ल मारने के बाद अंत में copied लिखेंगे
यूँ तो दुनियाँ में उदासी की वजह बहुत है पर फोकट में खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है
aaj ka gyan "लड़की और नौकरी तभी छोड़ें……जब दूसरी हांथ में हो
No comments:
Post a Comment